A Life Of

Learning, Relating and Gratitude

With Linesh Sheth

 

ध्यान में जैसा तुम्हारा सन्दर्भ वैसाही तुम्हारा अनुभव होता है

मैं शिवलीला हूँ. soil की लबे समय से स्टूडेंट हूँ नियमित रूपसे सुबह 4 बजे उठकर सालो से प्रतदिन दो घंटा प्रैक्टिस करती हूँ.

आज मैं soil के सेशन में अपनी प्रक्टिसों को चेक करने और कुछ नइ प्रैक्टिस को सीखने आई थी.

आज मैंने जाना की जसि सन्दर्भ में हम ध्यान

उस भीतर के माहौल के slowness में मुझे ऐसा महकरते हैं वह सन्दर्भ अपना अनुभव निशचित करता है. आज इसी शिक्षा के आधार पर मैंने अनंतता, और अगाध शांतता के सन्दर्भ में बहुत धीरेसे अपने आंखों को अपने आप सहजता से बंद होने दिया. सूस हुवा जैसे universe की सुसंगतता, उसकी प्रयत्न शून्यता और उसका बैलेंस मेरे भीतर फैल रहा है.

मैंने महसूस किया की साँस अपने अप चल रही है, सब कुछ सहजता से अपने आप हो रहा है. कुछ ही समय में उसने मुझे इतनी सहजतासे सथरि कर दया की मुझे लगा जैसे इसके जैसी भीतर की परसिथतिमिने कभी महसूस नहीं की.

मेरे भीतर एक बड़ी ऊर्जा की वृद्धि का उगम मैंने पाया. उस दिन शाम हो गई थी. दिनभर घूमके मैं धक गई थी. ऐसा लग रहा था जैसे थोड़ा रुक जाऊं पर कॉस्मिक मैडिटेशन ने सिर्फ कुछ ही पलो में ऊर्जामय कर दिया. ऐसा लगा जैसे रिचार्ज होकर आगे बढ़ने के लिए ready हूँ

आज के मैडटिशन की खास समज यह थी की सन्दर्भ meditation का टर्निंग पॉइंट है. मन की शांति लिए जब हम ध्यान करते हैं तो हमारी चेतना मन की मर्यादा में हमें सीमीत रखती है

पर जब हम अपनी छोटीसी मर्यादाओं के परे अनंत के साथ एकात्म होने के लएि ध्यान करते है तो उसकी अमापता, उसकी सुसंगतता, उसकी प्रयत्न शून्यता और उसके बैलेंस के साथ एक हो पाते हो.

एक में प्रयत्न होता है, दुसरे में सहजता होती है

शिवलीला

मुंबई